हेरोइन तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग केस में गौरव डावर गिरफ्तार, कोर्ट ने 5 दिन की ईडी कस्टडी दी
नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के हेडक्वार्टर ऑफिस ने ड्रग तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में गौरव डावर को गिरफ्तार किया है। गौरव डावर, अशोक डावर के पिता हैं। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी-लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई है। मामले में आरोप है कि हेरोइन को सेमी-प्रोसेस्ड टैल्क पाउडर में छिपाकर बड़े पैमाने पर भारत लाया गया था। इस नेटवर्क से जुड़े नशीले पदार्थ दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में भी बरामद किए गए थे।
गिरफ्तारी के बाद गौरव डावर को नई दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट स्थित वेस्ट डिस्ट्रिक्ट में स्पेशल जज (पीएमएलए) के समक्ष पेश किया गया। अदालत ने आरोपी को पांच दिन की ईडी कस्टडी में भेज दिया।
ईडी ने यह जांच नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) की एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। एनआईए ने हरप्रीत सिंह तलवार और अन्य के खिलाफ यूएपीए, 1967, एनडीपीएस एक्ट, 1985 और आईपीसी, 1860 के तहत ड्रग तस्करी से संबंधित मामला दर्ज किया था। एनआईए इस मामले में पहले ही छह चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इनमें आरोप लगाया गया है कि कई आरोपी अफगानिस्तान, पाकिस्तान और दुबई से संचालित अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी सिंडिकेट के संपर्क में थे।
जांच में मास्टरमाइंड वितायश कोसर उर्फ राजू दुबई, पाकिस्तानी आईएसआई एजेंटों और अफगान नागरिकों के बीच कथित गठजोड़ की बात सामने आई है। ईडी के मुताबिक, ड्रग्स की अवैध बिक्री से हासिल 74 करोड़ रुपये की रकम हवाला के जरिए अफगानिस्तान भेजी गई। जांच एजेंसी के अनुसार इस रकम का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों की फंडिंग में किया गया।
ईडी की जांच में प्रतिबंधित सामान की तस्करी, ड्रग्स से हुई कमाई के बंटवारे और हवाला लेनदेन के जरिए कुल 89 करोड़ रुपये की अपराध से हुई कमाई (पीओसी) का पता चला है। इसमें एनआईए द्वारा चिन्हित 74 करोड़ रुपये की हवाला रकम भी शामिल है। अपराध से हुई अन्य आय का पता लगाने के लिए जांच जारी है।
पीएमएलए के तहत मामले में कई बार तलाशी ली जा चुकी है। इनमें 15 जुलाई से 17 जुलाई के बीच की गई तलाशी भी शामिल है। जांच के मुताबिक गौरव डावर ने सह-आरोपी हरप्रीत सिंह तलवार के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट की नशीले पदार्थों की खेप को आगे पहुंचाने में मदद की। इसके बदले कथित तौर पर उन्हें सामान और हवाला के माध्यम से भुगतान किया गया।
ईडी के अनुसार, इस भुगतान में मास्टरमाइंड राजू दुबई की ओर से भेजी गई प्रतिबंधित वस्तुएं शामिल थीं। इनमें “गुडांग गरम सिगरेट” और “सुपारी” की खेप बताई गई है, जिसमें सूखे खजूर और परफ्यूम आदि शामिल थे। जांच में यह भी सामने आया कि गौरव डावर को दुबई जाने के दौरान कई बार राजू दुबई से एईडी में नकद रकम मिलने का भी आरोप है।
जांच एजेंसी के अनुसार ड्रग्स और प्रतिबंधित सामान की तस्करी से हासिल कथित अवैध रकम को कमर्शियल हॉस्पिटैलिटी वेंचर्स, नाइट क्लबों और लग्जरी संपत्तियों में लगाया गया। ईडी का आरोप है कि गौरव डावर ने सह-आरोपियों के साथ मिलकर दिल्ली के “प्लेबॉय क्लब” और “व्हाइट क्लब” में नकद निवेश किया। ये क्लब न्यूएरा फीस्ट एंड हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड के जरिए संचालित किए जाते थे।
ईडी के मुताबिक, गौरव डावर की गिरफ्तारी ड्रग तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला लेनदेन से जुड़े नेटवर्क पर कार्रवाई के तहत की गई है। मामले में आगे की जांच जारी है।

