Health

बच्चों का बढ़ता स्क्रीन टाइम आंखों के लिए बन सकता है परेशानी, ऐसे रखें नजरों का ख्याल

आज के डिजिटल युग में ऑनलाइन पढ़ाई और मनोरंजन के चलते बच्चों की दिनचर्या में स्क्रीन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ गया है। मोबाइल, टैबलेट और कंप्यूटर बच्चों के जीवन का अहम हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन इसका सीधा असर उनकी आंखों और शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। आगामी 8 अक्टूबर 2026 को मनाए जाने वाले विश्व दृष्टि दिवस (World Sight Day) के अवसर पर वैश्विक अभियान ‘लव योर आइज़’ (अपनी आंखों से प्यार करें) के तहत बच्चों की दृष्टि सुरक्षा और उनके सही स्क्रीन टाइम को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है।

स्क्रीन टाइम और आंखों पर इसके दुष्परिणाम
विशेषज्ञों के मुताबिक, लंबे समय तक लगातार स्क्रीन के सामने रहने से बच्चों की आंखों में गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसमें आंखों का सूखापन, थकान, सिरदर्द और धुंधलापन आम है। इसके अलावा, नजदीक की चीजों पर लगातार फोकस करने और आउटडोर गतिविधियों में कमी आने के कारण बच्चों में मायोपिया (निकट दृष्टि दोष – दूर की चीजें धुंधली दिखना) का खतरा काफी बढ़ जाता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशानिर्देशों के अनुसार:

1 वर्ष से कम उम्र: के बच्चों के लिए किसी भी प्रकार के स्क्रीन समय की बिल्कुल सलाह नहीं दी जाती है।

2 से 4 वर्ष की आयु: के बच्चों के लिए स्क्रीन देखने का समय प्रतिदिन अधिकतम 1 घंटे से अधिक नहीं होना चाहिए, और जितना कम हो उतना बेहतर है।

बच्चों की आंखें सुरक्षित रखने के कामगार उपाय
माता-पिता इन आसान उपायों को अपनाकर बच्चों की आंखों की रक्षा कर सकते हैं:

20-20-20 नियम अपनाएं: बच्चे को कहें कि हर 20 मिनट के बाद स्क्रीन से नजर हटाकर करीब 20 फीट दूर किसी वस्तु को कम से कम 20 सेकंड के लिए देखें।

आउटडोर खेल: बच्चों को रोजाना कम से कम 90 मिनट दिन के उजाले में बाहर खेलने के लिए प्रोत्साहित करें।

दूरी और समय सीमा: मोबाइल या टैबलेट को आंखों के बेहद पास रखकर देखने से रोकें। सोने से कम से कम एक घंटा पहले स्क्रीन का इस्तेमाल बंद कर दें।

नियम बनाएं: भोजन के समय, पढ़ाई के दौरान और सोने से पहले घर में ‘स्क्रीन-फ्री’ माहौल रखें। अचानक पूरी तरह पाबंदी लगाने के बजाय स्क्रीन का समय धीरे-धीरे कम करें।

विशेषज्ञ की सलाह: यदि बच्चे को बार-बार सिरदर्द, आंखें मिचमिचाने या दूर की चीजें देखने में परेशानी हो, तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ (Ophthalmologist) से जांच कराएं।